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मंगलवार, 15 जुलाई 2025

चुसाइल वोटर आ बुताईल बलब

चुसाइल वोटर आ बुताईल बलब


आलोक पुराणिक

चुनावी गतिविधियन पर कवि जालीदास रचित चुनाव प्रपंच नामक महाग्रंथ के कुछ महत्वपूर्ण छन्द अईसे बा :

वोटाणि, खोटाणि, भा वार्ता आफ हार्ड पोटाणि
तबहियों ना पिघलल वोटर, सिर पर पड़ल सोटाणि.
चालू वोटर आ टालू महबूबा के पूछऽ ना बात
केहू ना जान सकल, केहू ना बूझ पावल हे तात.

कहे के मतलब कवि जालीदास ई कवित्त खास तौर पर ओह कैंडीडेटन का दशा आ दिशा पर लिखले बाड़न जे चुनाव के रिजल्ट अईला का बाद पस्त होके पड़ल बाड़न.

चुनाव से पहिले वोट के बात कईनी, तरह तरह के खोट से रिझावे बझावे के कोशिश कइनी. पोटा लगावे के बात कइनी. बाकिर वोटर नाहिये नू पिघलल आ ओकर जवाब मूड़ी पर सोटा का तरह पड़ल बा. ज्ञानीजन कह गईल बाड़न कि दू गो समुझल बड़ामुश्किल होला, पहिला त चालू वोटर के आ दोसरे टालू महबूबा के जवन रोज टालेले प्रणय निवेदन के. साफ मनो ना करेले आ साफ हँओ ना करे ले.

अइसहीं वोटर बाड़े जे चुनाव का पहिले घर का आगा एगो पार्टी के झंडा लगा के कुछ दोसरे सन्देश देबेले बाकिर गरदन में दुपट्टा दोसरे पार्टी के पहिरले रहेले. वोट डाले घरी तीसरका पार्टी के वोट दे आवेले आ सभका से चउथका पार्टी के वोट देबे के बात करेलन सन.आ जब रिजल्ट आवेला त डांस करे जीते वाला पार्टी का दफ्तर चहुँप जाले.अइसनका चालू वोटर आ वइसनका टालू महबूबा के भाँपल केहू का बस में नईखे, मोरे बाप.

बदलल एहिजा के खेला,
मजनू ना पहिचाने लैला,
रोमियो का लगे चहुँपली जब जूलियट
जवाब मिलल चल हट, मुँहफट
वोटर के देख के लागल अईसे करेंट
जईसे कर्जखोर देखले होखे वसूली के एजेंट.

कहे के मतलब चुनाव का बाद खेला बदल गईल बा. मजनू लैलो के पहिचाने से इन्कार कर रहल बा. मजनू के इंटैंशन साफ बा कि अब चुनाव त हो चुकल आ लैला वोटर का तरह चूसा चुकली. अब उनुका के भाव काहे दिहल जाव. अईसहीं जब जूलियट रोमियो का लगे चहुँपली त बतावल गईल कि चलऽ हटऽ, चुनावी मौसम खतम हो चुकल. अब भाव मत खा. जवन नेता पहिले खंभा आ पेड़ो से वोट मांगत फिरत रहुवे अब वोटर देख के अईसे बिदकत बा जईसे कवनो कर्जखोर वसूली करे वाला एजेंट देख लिहले होखे.

मतलब कि दू गो प्रेमियन के प्रेम तूड़वावे के होखे त ओह में से एगो के नेता आ दोसरका के वोटर बना दिहल चाहीं. कुछ दिन बाद नेता प्रेमी वोटर प्रेमिका के चिन्हहूं से मुकर जाई. अकबर का टाईम में ई तरकीब मौजूद ना रहुवे, ना त अनारकली सलीम काण्ड बहुते ठीक ठाक निपट गईल रहित. सलीम के फतेहपुर सिकरी विधानसभा इलाका के कैंडिडेटे बना दिहल काफी रहित, फेर वोट पड़ गईला का बाद ऊ अनारकली के पहिचानहूं से इन्कार कर दित.

ज्ञानी जन कहत बाड़न कि चुनाव का बाद नेता पति पत्नियो के पहिचाने से मुकर जाव त अचरज नाहोखे के चाहीं. चुसाइल वोटर बुताईल बलब का माफिक होखेला,से ओकरा पर टाइम खोटी काहे करऽ.


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

पुराणिक जी के ई रचना आ अउरिओ कई गो रचना बरीसन पहिले अंजोरिया पर प्रकाशित भइल रहली सँ. पुरनका अंजोरिया चूंकि वर्डप्रेस पर ना रहल से ओह पर के रचना गँवे गँवे एह ब्लॉग पर डालल जात बा. अबहियों एगो बड़हन भण्डार बाकी बा आवे से. एहसे रउरा से निहोरा बा कि बीच बीच में आवत रहीं आ नया रचनन ला अंजोरिया के वर्डप्रेस संस्करण पर जाइल करीं. 


डाकू होखे त अईसन

डाकू होखे त अईसन

आलोक पुराणिक

साहेबजी सोमालिया अब एगो ब्राण्ड हो गईल बा, गब्बर सिहं लेखा. अदन का खाड़ी से पचास पचास किलोमीटर दूर जब कवनो जहाज निकलेला त कैप्टन जहाज ड्राइवर से कहे ला, निकल ले बे, पांच सौ के स्पीड पे, नाहीँ त सोमालिया के डाकू आ जाई.

साँचहूं जवन इंटरनेशनल कवरेज बुश का हिस्सा में जात रहुवे, अब सोमालिया का डकैतन का हिस्सा में जाये लागल बा. सोचत बानी काहे ना सोमालिया का राजदूतावास में जा के अरज करीं कि सोमालिया डाकू टूरिज्म पैकेज चलावे. टूरिस्टन के ओह जगहा ले जाईल जहवाँ सोमालिया के डाकू डकैती डालेलन सन. छोटको बोट में कवनो खोट ना रही, बस डकैती होखे के गारण्टी रहे के चाहीं. बड़को शिप त धराइये जाले सन.

खैर मसला ई बा कि चिंता आ चिंतन के विषय ई बा कि सोमालिया में आखिर अतना समुद्री डाकू आ कहाँ से गईलन स. हमरा त बुझात बा कि सोमालिया के डाकू ब्राण्ड भँजावे खातिर कुछ दोसरो लोग अपना के सोमालिया के डाकू बतलावे लागल बा. अतना जहाज लुटात बाड़ी सन कि सोमालिया जईसन छोटहन देश के सगरी डाकू मिलियो के ना लूट पईहें. कतनो ओवर टाइम कर ल सन. करामात केहू दोसरे के बा. आ एह लपेटा में सोमालिया डाकू ब्राण्ड बन गईल बा.

सोमालिया के दू गो बंदन से एने भेंट भईल. ऊ परिचय दिहलें कि प्रोफेसर हउवन जा. एने के बंदा लोग भेंट करे से नकार दिहल. सोमालिया के भईलऽ आ डाकू ना भईलऽ त मिलला से फायदा का ? ई त कुछ वइसने हो गईल कि नेता बस्ती के भईलन आ तबहियों शरीफ हो गईलन. से भेंट कईला से फायदा का.

कुछ दिन में अब ई होखी कि लोकल फिरौतीबाज कहे लगीहें सन कि हम सोमालिया के फिरौतीबाज हईं, चुपचाप हतना करोड़ रुपया होह जगहा पर राख आवऽ. सोमालिया डाकू ब्राण्ड का सम्मान में बंदा बगैर चूं चपड़ कईले रकम राख आई. ब्राण्ड इमेज आउरि होला का जी.

सोमालिया तूँ त ग्रेट हउव जी. नाकी देशन में फिरोतीबाज होलन, बाकिर सोमालिया में त फिरौतीबाजन का लगे पूरा देशे बा.

खैर मसला ई बा कि आखिर सोमालिया डकैतन का रूप में काम के कर रहल बा. हमरा त सुबहा बा कि एने बहुते टेलीकाम मोबाइल प्लान बेंचे वाला सोमालिया जा के डाकू हो लिहल बाड़न सन. एहिजा त मंदी आ गईल बा. तरह तरह के टेरिफ प्लान बेंचे में दिक्कत आ रहल बा. ओहिजा समुन्दर में सुभहिता बा. कहाँ ठेलत फिरऽ एक ह एक गो प्लान, ओहिजा सोझे एगो जहाजे ठेल के ले जा. ना त ईहवाँ टेरिफ प्लान खरीदे वालन का बस में कुछ बा, ना ओहिजा जहाज वालन का हाथ में.

भा हो ना हो, सोमालिया के डाकू का वेश में ऊ सभ चलि गईल बाड़न सन जवन पहिले एहिजा बतलावत रहलन स कि युकिलिप्टस उगावऽ आ हतना साल में हतना रकम पावऽ. एहिजा वाला त धरपकड़ कर लेबेलन स कि ले आवऽ वापिस रकम. सोमालिया का समुन्दर में सुभीता बा.

चलऽतानी हमहूं सोमालिया के डाकूवन के फ्रेचाइजी ले लेत बानी, कवनो धंधा में आगा चल के कामे आ जाई.


पाटिल जी का सम्मान में

ई व्यंग्य ना हऽ.

आजु सिरिफ आ सिरिफ मौन बा, महान हास्यकार शिवराज पाटिल जी का सम्मान में.

पहिले आतंकवाद का मुकाबिला खातिर ऊ जे बलत रहलन ओह पर हँसी आवत रहुवे, फेर ऊ अपनहीं हास्यास्पद हो गईलन. आ अब त शर्मनाक हो गईल बाड़न. सगरी हास्यकारन के ओकनी का धंधा से बहरियावे में लागल पाटिल जी का सम्मान में आजु कुछवु ना.

उनुका सम्मान में प्लीज पांच मिनट के मौन राखीं.


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

पुराणिक जी के ई रचना आ अउरिओ कई गो रचना बरीसन पहिले अंजोरिया पर प्रकाशित भइल रहली सँ. पुरनका अंजोरिया चूंकि वर्डप्रेस पर ना रहल से ओह पर के रचना गँवे गँवे एह ब्लॉग पर डालल जात बा. अबहियों एगो बड़हन भण्डार बाकी बा आवे से. एहसे रउरा से निहोरा बा कि बीच बीच में आवत रहीं आ नया रचनन ला अंजोरिया के वर्डप्रेस संस्करण पर जाइल करीं. 


ऊँट का मुँह में काजू

ऊँट का मुँह में काजू

आलोक पुराणिक

अबहीं ले जे लोग मल्लिका सहरावत भा राखी सावंतजी के अँगड़ाई पर फोकर करत रहुवे, हम खाली टीवीये चैनल के बात नईखी नू करत, अब उहो लोग ऊँट का करवट पर चिन्तित हो उठल बा.

मल्लिका जी से ऊँट पर आ गईल बा सौंदर्यबोध, थैंक्स टु चुनाव.

हम सोचनी काहे ना सोझे ऊँटे से बतिया लिहल जाव.

चहुँपनी त देखनी का ऊँट कवनो टीवी चैनल पर डांस के रियल्टी शो देखत रहुवे. कान्ह पर भाजपा के झण्डा रहुवे, ओकरा ऊपर कांग्रेस के झण्डा रहुवे. बसपो के झण्डा पीठ पर लिहले रहुवे.

हम पुछनीं, कवन करवट बईठबऽ ?

जवाब मिलल, हम त कबहिंयो ना पूछीं कि नेता कवना करवत बईठी.

देखिये नेतो से इंपोर्टेंट रउरा बानीं. सगरी जानवरन में रउरे करवट के महत्व बा. नेता के करवट आ बानर के करवट एके जईसन होला. केहू अंदाजे ना लगा सके कि उछल के मामिला कहवां ले चलि जाई. बाकिर रउरा से त ढेरे उम्मीद बा.

ऊँट एक तरफ झुके के कोशिश कईलस, फेर एके झटका में खड़ा हो गईल.

रउरा ओह करवट बईठे जात रहुंवीं, फेर खड़ा हो गईनी. फाइनल करीं ना.

ऊँट हँसे लागल आ कहलस, अच्छा.., नागों का जश्न, नाग का प्यार वगैरह प्रोग्राम त कई दिन ले देखावत रहे ल, बाकिर ऊँट से एके घंटा में फाइनल करवावत बाड़ऽ.

ओने से भाजपा के जलूस निकलत रहुवे त ऊँट भाजपा के झण्डा उपर कर लिहुवे. जलूस बाला लोग ऊँट के काजू के बरफी खिअवलसि आ एगो कार्यकर्ता वादा कईलसि कि जीतला का बाद ऊँट के अमेरिकन ऊँटनी का साथे छुट्ती मनावे खातिर स्वीट्जरलैण्ड भेजल जाई.

फेर कांग्रेस के जलूस लउकल, त ऊँट कांग्रेस के झण्डा उठा लिहलसि. अबकी बेर ऊँट से कहल गईल कि लम्बाई बढ़ाओ आयोग के अध्यक्ष ओकरे के बनावल जाई.

ओकरा बाद बहुजन समाज पार्टी का रैली में ऊँट हाथी का गले मिलल.

हम डँटनी, ऊँट रउरा विश्वास करे लायक ना रह गईनी. राउर त कुछ पक्के नईखे.

हमार पक्का नईखे, तबहियें नू तूंहुँ इन्तजार करत बाड़ऽ. जेकर सबकुछ पक्का होखेला ओकरा में मीडिया के कवनो दिलचस्पी ना रह जाव. पक्का त अब मदनलाल खुराना जी के बा कि कतहीं ना जईहें. देख लऽ मीडिया में केहू उनुका से बाते नइखे करत. ऊँट एगो महीन बात कहलसि.

खैर पता चलल कि ई त नटवर सिंह के बेटा जगत सिंह के ऊँट रहुवे. जगत पहिले कांग्रेस में रहलें, पिछला हफ्ता बीएसपी में रहलें, परसों बीजेपी में रहलें. ताजा स्कोर मालूम नइखे.

हम ऊँट नम्बर दो, ऊँट नम्बर तीन, ऊँट नम्बर चार सबका से मिलनी. सभकर इहे हाल रहुवे.

फेर एगो ऊँट विशेषज्ञ बतलवलन कि दिल्ली में सगरी ऊँट अइसने बाड़न सन, कवनो जगत सिंह के बा, कवनो भजनलाल जी के, कवनो रामविलास पासवान जी के.

अब रउरे बतलाईं कि कइसे बतलावल जाव कि ऊँट कवना करवट बईठी.


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

पुराणिक जी के ई रचना आ अउरिओ कई गो रचना बरीसन पहिले अंजोरिया पर प्रकाशित भइल रहली सँ. पुरनका अंजोरिया चूंकि वर्डप्रेस पर ना रहल से ओह पर के रचना गँवे गँवे एह ब्लॉग पर डालल जात बा. अबहियों एगो बड़हन भण्डार बाकी बा आवे से. एहसे रउरा से निहोरा बा कि बीच बीच में आवत रहीं आ नया रचनन ला अंजोरिया के वर्डप्रेस संस्करण पर जाइल करीं. 


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ओटोक्का, होबालू, होटूंगा

 

ओटोक्का, होबालू, होटूंगा


आलोक पुराणिक

खराब खबर नियरा से आवेला निमन खबर दूर से.

काल्हु रात पुलिया का लगे हमरा संगे छिनतई हो गईल, मतलब कुछ लोग हमार सब कुछ लूट लिहलन. हमार सातो रुपिया छीन लिहलन सन. हम ओहनी के धमकवनी कि अगिला पुलिया पर पुलिस पिकेट बा जा के शिकायत कर देम, त ऊ हँसे लगले सन. कहले सन, पुलिसे से पूछ के त एह पुलिया पर छिनतई करत बानी सन.

निमन खबर दूर से ई आईल कि अदन का खाड़ी का लगे एगो भारतीय नेवी अपना देश के एगो व्यापारिक जहाज के लूटे से बचा लिहलसि. सोमालिया के डकैत लूटै आईल रहले सन. छोट छोट डेंगी लेखा नाव पर सवार लूटेरा दुनिया जहान के बड़ बड़ जहाज के लूटे खातिर कमर कसले, नजर टिकवले सोमालिया के समुद्री डाकू एक तरह से अभिनन्दनीय लागे लन स.

"सतसैया के दोहरे अरु नाविक के तीर. देखन में छोटन लगे, घाव करे गम्भीर" वाला कवित्त के सही साबित करत कि विशाल जहाजन के छोटकी नाव पर सवार हो के लूटल जा सके ला. सोमालिया के डकैत ई बात बार बार बतलावत बाड़े सन. स्माल स्केल के महत्व विराट का आगा खतम नइखे हो गईल, सोमालिया के डाकू बेर बेर ईयाद दिआवेले सन.

खैर मसला ई बा कि अगर नेवी वाला गहिरा समुन्दर में जा के डाकूअन के पकड़ सकेलन स त ई हमनी का शहर मुहल्ला के राहनज, डाकूअन के काहे ना पकड़ल जा सके ?

नेवी के एगो बंदा एह सवाल का जवाब में बतलवलसि कि गहिरा समुन्दर में डाकूअन के पकड़ धकड़ का बाद ओहिजा के टापमटाप नेता के फोन ना आ जाला कि छोड़ दऽ. आ अगर आईयो जाव त नेवी वाला ओकनी के भसे ना बुझ पावत होखिहन.

जईसे सोमालिया के डाकूअन के धर पकड़ का बाद सोमालिया के कवनो लीडर के फोन नेवी का अफसर का लगे आईल होखी,
होकाला, बोकालम ओटोक्का, होबालू, होटूंगा. मतलब हमरा बंदन के छोड़ दऽ.


नेवी वाला बूझबे ना कइले होखिहन सन. समुझले होखिहन सन कि ब्रेक डांस खातिर कवनो गाना गावत होखि. आ एहि कन्फ्यूजन में डकैत अरेस्ट हो गईल होखिहन सन.

ई त बहुत मजे क कन्फ्यूजन बा.

नगला शोला भोला थाना में तमिलनाडु के अफसर ले आके बईठा देबे के चाहीं. लोकल रहजन भीतर होखे आ लोकल विधायक फोन करे त तमिल अफसर समुझे से इन्कार कर देव आ रहजनवा भीतरे रहि जाव.

कन्नड़भाषी पुलिस के चित्तौड़गढ़ में लगा दऽ. मलयाली पुलिस लखनऊ का हजरतगंज में गश्त करे.

भाषा जोड़े ले, चोर आ पुलिसो के. एह एकता के भसे से तूड़ल जा सकेला.

या त पुलिस के इलाका बदल दऽ भा फेर कंपलसरी कर दिहल जाव कि यूपी के रहजन डाकू आपन हुनर कर्नाटक में देखलईहन. बोले त एक इलाका के कलाकार दोसरे इलाका में करतब देखइहन जा.

वइसहूँ एक तरहा से त आजुओ देखावते बाड़न सन, पूरा भारतवर्ष के नेतवा दिल्ली में आपन हुनर देखावत बाड़न सन कि ना ?


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

 

पुराणिक जी के ई रचना आ अउरिओ कई गो रचना बरीसन पहिले अंजोरिया पर प्रकाशित भइल रहली सँ. पुरनका अंजोरिया चूंकि वर्डप्रेस पर ना रहल से ओह पर के रचना गँवे गँवे एह ब्लॉग पर डालल जात बा. अबहियों एगो बड़हन भण्डार बाकी बा आवे से. एहसे रउरा से निहोरा बा कि बीच बीच में आवत रहीं आ नया रचनन ला अंजोरिया के वर्डप्रेस संस्करण पर जाइल करीं. 




रविवार, 13 जुलाई 2025

राजा भर्तृहरि के बैरागकथा नया अन्दाज में

 

राजा भर्तृहरि के बैरागकथा नया अन्दाज में

आलोक पुराणिक

राजा भरथरी अपना परम प्रिय रानी से राज के बात बतलवलन ‍हे प्राणपियारी, हमार मेडिकल रिपोर्ट आईल बा जवना में हमरा कैंसर के शक बतलावल गईल बा. सुनऽतानी एह बेमारी के ईलाज स्विट्जरलैण्ड में होखेला. ओहिजा जा के आपन इलाजो करवा आयेम आ हालही में हवाई जहाज घोटाला में जवन रकम बटोरले बानी तवनो के स्विस बैंक में जमा करववले आयेम. राज के बात बा एहसे ई बात बस तोहरे के बतालवत बानी. काहे कि जवन डाक्टर हमार जाँच कईले रहुवे ओकर मर्डर करवा दिहले बानी आ आरोप ऊह ससुरा कवि पर लगवा दिहल बानी जवन आपन कविता सुना के सबके बोर करत रहेला. हम ई घोषणा करवा देम कि ऊ कवि डाक्टर के जबरिया आपन पचास गो कविता सुना दिहलसि जवना चलते डाक्टर बोर होके मर गईल.

अतना सुनते रानी कांप उठली. ऊ कवि ऊनुकर प्रेमी रहुवे.

ओहि रात रानी अपना कवि प्रेमी के बतला दिहली, ए कवि जी, तू एहिजा से फूट लऽ ना त जिनिगीये से फूट जईबऽ. तू जा के फ्रांस में एनआरआई बन के सेटल हो जा, फेर हमहूं ओहिजे आ जायेम. तहरा हमरा प्यार परलागल बुधवा के गरहन अब खतम होखे वाला बा काहे कि ऊ अब निपटे वाला बा. बस ई राज के बात केहू से कहीहऽ मत.

बेचारा प्रेमी कवि अतना सुनते कांप गईल कि एह रानी का साथ ओकरा पूरा जिनिगी बितावे के पड़ी. ऊ त एही फिराक में रहुवे कि राजा जियत रहे, रानी का साथे ओकर चक्कर चलत रहे आ ओकर मुर्गा मोबाइल लाइफ स्टाइल के बिल रानी भरत रहे. संक्षेप में ई कि रानी बस ओकर प्रेमिके बन के रहे.

कवि ई बात अपना असली प्रेमिका के जा बतलवलसि. संगही धिराईयो दिहलसि कि केहू से कहीहऽ जिन.

ऊह प्रेमिको के एगो दोसर प्रेमी रहुवे, एगो दरोगा. ऊ पूरा किस्सा ओह दरोगा के बतला दिहलसि.

दरोगा के दोस्ती एगो स्मगलर से रहुवे. एकदिन खायेपिये का बईठका में ऊ दरोगा ई बाति ओह स्मगलरवा से बता दिहलसि कि राजा टें बोले वाला बा आ नया सेटअप में अबहिये से जोगाड़ बईठावल शूरु कर दऽ. आ सुनऽ ई राज के बाति बा केहू से कहीहऽ मत.

स्मगलर के हमजोली एगो नेता रहुवे. ऊ नेता से कहलसि कि गुरु राजा टें बोलेवाला बा. ओकरा के जा के समुझावऽ कि कुछ रकम तोहरा मार्फत तोहरा दारू, स्मैक, चरस, कैबरे, हवाला का धंधा में लगा देव. बहुते रिटर्न मिली, स्विसो बैंक ले जियादा. बाकिर ई बात राज के बा केहू से कहीहऽ मत.

अगिले दिन ऊ नेता राजा से भेंट करे चल दिहलसि. जाके राजा से का कहलस कि का स्विस फ्विस बैंक का चक्कर में पड़ल बानी. एहिजे सगरी रकम लगा देम धांसू धंधा में.

राजा ताड़ गईलन कि दाल में करिया नईखे दलवे करिया गईल बुझात बा. दहाड़त पुछलन, बताव तोरा के के बतलवलसि हमरा स्विस यात्रा आ बेमारी के बात ? ना बतलइबे त तोरा के हम ओही कवि का कोठरी में ठेल देम ओकर एक सौ कविता सुने खातिर. जल्दी बोल.

नेता के हकबकी लाग गईल. डरते डरत पूरा किस्सा बयान कर दिहलसि कि ऊ सम्गलरवा से सुनलस, स्मगलरवा दरोगवा से, दरोगवा अपना वेसवा प्रेमिका से, वेसवा प्रेमिका अपना प्रेमी कवि से, आ ऊ कवि रानी से ई बात जनलसि. रानी के त रउरे बतलवले रहनी.

अतना सुनते भरथरी के दिल टूट गईल. समुझ में आ गईल कि दुनिया गोल बा आ गोलमालो. बैराग धड़ल्ले से दिल का कोठरी में घुसल आ राजा सब कुछ छोड़ के जंगल में जाये के तय कर लिहलन. एतना निश्चय करिके ऊ रानी से बतलावले चलल कि रानी माफी मांग लीहि त ओकरो के अपना संगे लिअवले जायेम.

रानी जब पूरा बात सुनली त कहली, ठीक बा. जाते बानी त अपना स्विस बैंक के खाता नम्बरवा त बतलवले जाईं. माया के तियाग करते बानी त हमरे के दिहले जाईं.

रानी के ई वचन सुनते राजा भरथरी के खटाक से ओहीजे मोक्ष मिल गईल.

बोल नोटाय नमः. बोल खोटाय नमः


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

आलोक जी के ई आ बाकी रचना भोजपुरी में पहिलका वेबसाइट अंजोरिया पर प्रकाशित भइल रहल.