गजल
कबो चर्चा नाही होला ...
शिवानन्द द्विवेदी सहर
हम वफ़ा करके भी दागदार हो गइलीं
आ उनका बेवफाई के कबो चर्चा नाही होला !
उनका हर मुस्कराहट के ज़माना का खबर रहे
हम उनका याद में रोंई तबो चर्चा नाही होला !
ऊ हमार नाम हथेली पर लिखि के मिटा दिहली
हम खुद ही के मिटा दिहली तबो चर्चा नाही होला !
ऊ हमार ग़ज़ल पढि के अक्सर मुस्करा देली
हम आंसू रोज़ बहावेनी तबो चर्चा नाही होला !
उनके खातिर सारा रिश्ता छोड़ दिहली हम
ऊ हमके छोड़ भी दिहली तबो चर्चा नाही होला !
उनके आपन बनावे में हम सब कुछ भुला दिहली
ऊ हमके ही भूला दिहली तबो चर्चा नाही होला !
हम उनका ज़ख्म पर मरहम लगवनी हरदम
ऊ उल्टे जख्म बरसवली तबो चर्चा नाही होला !
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शिवानन्द द्विवेदी सहर, सुपौत्र श्री नन्द लाल दुबे, ग्राम + पोस्ट - सजावं, थाना - लार, जिला - देवरिया (यू. पी.)